Ch. 41 RRG का प्रस्ताव – भारत में काला धन वापस लाने और काला धन कम करने हेतु

 

क़ानून-ड्राफ्ट लेखक – आशीष अदेशारा – http://www.fb.com/adeshara

संकलन- राहुल मेहता – https://www.fb.com/mehtarahulc

हिंदी में अनुवाद- प्रशांत गरजे – https://www.fb.com/beingpg

(इसके बारे में विस्तृत जानकारी आप इस नोट नं.#301.041 पर पा सकते है)

 (काले धन वापस लाने के प्रस्ताव का ज्यादातर हिस्सा आशीष अधेसरा ने लिखा है)

1. परिचय :

काले रुपये/डॉलर या काला धन क्या है ? भारत में काला धन क्या है ? और भारत के बाहर काला धन क्या है? और कौन सी राजपत्र अधिसूचनाएं (सरकारी आदेश जो हर महीने सरकार देती है) भारत में काले धन और काले रुपये को कम कर सकती है ? और कौन सी राजपत्र अधिसूचनाएं काला धन वापस ला सकती है ?

इसका जवाब देने में 200-400 पन्ने लगेंगे, जो मैं कुछ महीनो के भीतर छापूंगा | यहाँ मैं संक्षिप्त रूप में प्रस्तावित काला धन कम करने हेतु राजपत्र अधिसूचना और उसकी भारत में भूमिका और प्रस्तावित राजपत्र अधिसूचनाएं जिससे विदेशों (स्वित्ज़रलैंड, मौरिशियास, कैमन आइलैंड, इत्यादि ) से काला धन वापस लाया जा सके |

2. भारत में काला रूपया (काली धन-संपत्ति) क्या है ?

काला रूपया या धन-संपत्ति का मतलब होता है वो धन जो किसी ने टैक्स चोरी या गैरकानूनी ढंग से भ्रष्टाचार \ अपराध या दोनों करके प्राप्त किया हो | इन तीनों के अलग अलग श्रेणियां के उदाहरण देता हूँ  :

2.1.)  मान लीजिए एक व्यापारी 1 करोड़ का मुनाफा कमाता है और टैक्स नहीं भरता | तब वो 1करोड़ रूपया काला धन होगा | अब वो उस 1 करोड़ से एक घर खरीदता है और ये बताता है कि ये उसकी विरासत की संपत्ति है तो वो भी काली संपत्ति ही हुई | यहाँ पर ध्यान दें कि जो काम उसने किया उस 1 करोड़ को पाने के लिए वो पूरी तरह कानूनी है और नैतिकत है | सिर्फ उसका टैक्स ना भरना गैरकानूनी और अनैतिक है | यहाँ पर समस्या ये है कि उसके खिलाफ सबूत इकठ्ठा करना कि उसने 1 करोड़ रुपये कमाए, टैक्स नहीं भरा और उसका विरासत की संपत्ति एक धोखा है |

2.2. अब एक मंत्री या अफसर या जज 1 करोड़ की रिश्वत लेता है तो वो पूरा का पूरा 1 करोड़ काला धन माना जायेगा, चाहे वो टैक्स भरे या ना भरे | यहाँ भी जूरी को समझाना पड़ेगा कि उस व्यक्ति ने रिश्वत ली है |

2.3. अब अगर एक अपराधी 1 करोड़ कमाता है अपहरण या नशीले पदार्थों का धंधा करके, यहाँ भी पूरा का पूरा 1 करोड़ काला धन माना जायेगा, चाहे वो टैक्स भरे या ना भरे | और जूरी को समझाना पड़ेगा कि इस व्यक्ति ने अपराध करके 1 करोड़ कमाए और उसका टैक्स नहीं भरा |

अब यहाँ (2) और (3) की स्थिति में जुर्माना और सजा (1) वाली स्थिति से ज्यादा होनी चाहिए, और जब तक जूरी या आम-नागरिकों को यह साबित नहीं किया जाता कि ये कमाई भ्रष्टाचार या अपराध करके कमाई गयी है, जूरी या नागरिक संदेह का लाभ दे सकते हैं और ये मान सकते हैं कि ये पैसा सही तरीके से कमाया गया है | किसी भी हाल में, पहले तो सरकारी वकील को ये साबित करना पड़ेगा कि उस व्यक्ति के पास उससे ज्यादा संपत्ति है जितनी उसने घोषणा की है , जितने का उसने टैक्स भरा है | और साथ ही उसी या दूसरे सरकारी वकील को ये भी साबित करना होगा कि उसने भ्रष्टाचार या अपराध किया है | दोनों मामलो के परिणाम से कुल जुरमाना और जेल की सजा का समय निर्धारित होगा | अगर सरकारी वकील सिर्फ टैक्स चोरी ही साबित कर पाए तो उसे कम जुरमाना और जेल नहीं होगी | अगर सरकारी वकील ये भी साबित कर दे कि ये कमाई भ्रष्टाचार या अपराध करके कमाई गयी है तो ज्यादा जुरमाना और जेल की सजा भी होगी |

3. भारत के बाहर काला पैसा (डॉलर, धन-संपत्ति आदि) क्या है ?

भारत के बाहर वाला काला धन वो है जब वो व्यक्ति भारत में कमाया हुआ काले रुपये को डॉलर में परिवर्तित करता है और उसे विदेशी बैंकों में जमा करता है | तो अभी ये भारतीय रूपया डालर में कैसे बदला जाता है ? इसके कुछ तरीके है :

3.1. वैध (कानूनी) तरीका है – पैसे रिसर्व बैंक को देना और रिसर्व बैंक उस व्यक्ति को डालर देगी |

3.2.  काले रुपये को डॉलर में बदलने का एक तरीका है कि ऐसी वास्तु विदेशों से मंगवाना जिनका चालान का मूल्य उनके वास्तविक मूल्य से बहुत अधित है |  कहिये कि कंपनी-`क` के मालिक को एक  मशीन चाहिए जो 1 करोड़ रुपये (मतलब 20,000 डॉलर) का है | वो व्यक्ति एक कंपनी-`ख` को 1.5 करोड़ रुपयोंका चालान भेजने को कहेगा जो कि हुआ 30,000 डॉलर | तो भारत का रिसर्व बैंक  उसे 30,000 डॉलर देगी जिसमें से 10,000 डॉलर कंपनी-`ख` कंपनी-`क` के मालिक के स्विस बैंक के अकाउंट में जमा कर देगी |

3.3. विदेशी कंपनी को ज़मीन बेचना: कहें कि अमेरिका की एक कम्पनी को 100 करोड़ रुपयों की ज़मीन भारत में खरीदनी है तो वो कंपनी उस व्यक्ति को (भारतीय व्यक्ति जिसकी ज़मीन है) 20 करोड़ रुपये वैध तरीके से देगी, और बाकि के 80 करोड़ रुपये उसके स्विस अकाउंट में ट्रान्सफर कर देगी | दूसरे शब्दों में जब कोई विदेशी कंपनी भारत में जमीन खरीदती है, तब स्विस बैंक में पैसा जमा होता है |

3.4. भ्रष्टाचार: मान लीजिए कि कोई मंत्री, अफसर, जज या कोई भी अधिकारी रिश्वत लेने के बदले किसी विदेशी कंपनी का कोई काम करता है | तब वो विदेशी कंपनी उसके विदेशी खाते में रिश्वत के पैसे जमा कर देगी |

4. भारत में काला धन जमा रखना

    ध्यान दें कि  काला धन”  का मतलब  सिर्फ पैसा या सोना नहीं होता, वो ज़मीन भी हो सकती है | वास्तव में बहुत सा काला धन ज़मीन के रूप में है | जमीन उस व्यक्ति, उसके रिश्तेदार, उसकी कंपनी या किसी ट्रस्ट के नाम पर हो सकती है | धर्मार्थ न्यास (चैरिटेबल ट्रस्ट) सबसे कुख्यात माध्यम है काला धन छुपाने के लिए |

ज़मीन सबसे लोकप्रिय और सबसे ज्यादा काला धन जमा करने के लिए इस्तेमाल होने वाला तरीका है | कोई भी व्यक्ति जमीन खरीदने के लिए , जमीन-मूल्य का 60% से 80% नकद काला रूपया दे सकता है और बाकी वैद्य रूप से (वाईट में) दे सकता है |  और कुछ मामलों में जैसे कि विरासत के मामले में,  जमीन का सारा मूल्य 100% नकद , काला रूपया दे सकता है |

उदहारण के लिए , मान लीजिए कि कोई किसान की मृत्यु हो जाती है और उसके 4 बेटे उसकी जमीन बेच कर हिस्सा बाँटने की सोचते हैं | ऐसे में, कोई भी भारतीय प्रशासनिक सेवाकर्मी (आई.ए.एस), भारतीय पुलिसकर्मी (आई.पी.एस), जज या मंत्री उनके पास आकर काला रूपया देकर एक दस्तावेज लिखवा सकता है कि उनके पिता ने वो संपत्ति उस भारतीय प्रशासनिक सेवाकर्मी (आई.ए.एस), भारतीय पुलिसकर्मी (आई.पी.एस), जज या मंत्री के नाम की है |

अब जबकि भारत में सांसदों ने विरासत-कर रद्द कर दिया है , तो काला धन को न केवल जमा किया जा सकता है बलकी 1% नुकसान के बिना वो काला धन ,सफ़ेद धन हो जायेगा | स्पेन में अगर कोई व्यक्ति अपने रिश्तेदार के अलावा किसी को वारिस ठहरता है तो उसे 70% विरासात-टैक्स देना होता है, तो वहां अगर कोई इस तरीके से काले धन को सफ़ेद करने की कोशिश करता है, तो उसका 70% काला धन व्यर्थ जायेगा  | मैंने एक राजपत्र अधिसूचना ड्राफ्ट प्रस्तावित किया है जिससे जमीन को काले धन जमा करने के लिए इस्तेमाल करना कम हो जायेगा |

इसके अलावा सभी नगद पैसा काला धन नहीं होता |  उदहारण के लिए कोई व्यक्ति की आय यदि 10,000 रुपये है और वो टैक्स भरता है, फिर अपने बैंक में रखता है. बाद में जब वो बैंक से पैसे निकालता है तो ये पैसा काला धन नहीं होता | और उसी तरह कहें कि कोई व्यक्ति 10 करोड़ रुपये का चेक बैंक में जमा करता है और उसका टैक्स नहीं भरता तो वो काला धन हुआ |

सामान्य तौर पर , अगर पैसा भारतीय बैंक में जमा है तो बहुत कम नागरिक ही टैक्स न भरने की हिम्मत करेंगे | तो बहुत सा पैसा जो भारतीय बैंकों में है वो सफ़ेद है | और बैंक में जमा सारे पैसों में से आधा काला धन होगा और आधा सफ़ेद | नवम्बर 2011 तक के आंकड़ों (http://rbidocs.rbi.org.in/rdocs/Wss/PDFs/WSS021211F.pdf का पन्ना न. 4 देखें) के अनुसार कुल नकद और बैंक के पैसों का जोड़ भारत में 70 लाख करोड़ है और नकद नोट 9 लाख करोड़ है |

भ्रष्ट भारतीय रिसर्व बैंक गवर्नर कभी प्रति व्यक्ति के हिसाब से आंकड़े नहीं देता | प्रति भारतीय नागरिक के हिसाब से, भारत की जनसँख्या 121 करोड़ लेते हुए कुल नगद और बैंक के पैसों का जोड़  57,800 रुपये प्रति भारतीय नागरिक है और नकद 7400 रुपये प्रति भारतीय नागरिक हुआ | अब सारा नगद पैसा काला नहीं है | मान लीजिए आधा नगद पैसा काला धन है और आधा नगद सफ़ेद धन है | तो कुल काला रूपया प्रति भारतीय नागरिक  हुआ 3700 रुपये प्रति भारतीय नागरिक जो कि कुल नगद और बैंक में जमा पैसों का 6% हुआ | दूसरे शब्दों में काला धन नगद रुपयों के रूप में ज़रूर है लेकिन बहुत कम है |

सोना एक लोकप्रिय माध्यम जरूर है काला धन ज़मा करने के लिए लेकिन उसका अनुमान लगाने का कोई तरीका नहीं है | कुछ अनुमान, जिनकी कोई वैद्यता नहीं है कहते हैं कि भारत में 18,000 टन सोना है (नवम्बर 2011 का आंकलन) | इसका मतलब 15 ग्राम सोना प्रति भारतीय नागरिक है जो कि 45,000 रुपये प्रति नागरिक हुआ (नवंबर-2011 के हिसाब से 3000 रुपये प्रति ग्राम सोने का भाव है) | अब सारा सोना काला धन नहीं है क्योंकि बहुत लोगों ने अपनी मेहनत की कमाई से टैक्स भरने के बाद, सोना खरीदा है | हालांकि, विश्व स्तर के हिसाब से भारत कोई सोना बहुतायत वाला देश अब नहीं रहा है | कुछ अनुमानों के अनुसार, भारत में दुनिया के कुल सोने का 12% सोना है, जबके भारत की जनसँख्या विश्व की जनसँख्या का 12% है | तो भारत में सोना विश्व के औसत से नीचे है |  चांदी एक और माध्यम है काला धन जमा करने के लिए, फिर हीरे, पेंटिंग्स आदि , आदि | इसके अलावा, कोई व्यक्ति काला धन (जमीन, सोना आदि) अपने किसी रिश्तेदार, कंपनी या ट्रस्ट के नाम रख सकता है |

5. भारत के बाहर काला धन जमा करना

भारत में काला धन जमीन, सोना और नगद के रूप में रखा जाता है ,  वैसे ही विदेशों में भी काला धन जमीन, सोना और नगद के रूप में काला धन रखा जाता है | लेकिन एक अंतर है – भारत में कोई भी काला धन बैंकों में जमा करके नहीं रख सकता क्योंकि बैंक आयकर विभाग को सूचना दे देगा | वैसे ही कोई भी भारतीय नागरिक, दूसरे देशों में जैसे कि अमेरिका , यूनाइटेड किंगडम (इंग्लैंड) ,फ्रांस, जर्मनी इत्यादि में काला धन नहीं रख सकता क्यूँकि वहाँ के बैंक भारत के आयकर विभाग को सूचना दे सकते हैं | लेकिन ऐसे भी कुछ देश हैं, जैसे कि मॉरिशस, स्विट्ज़रलैंड, केमैन द्वीप इत्यादि जो उनके खातेदरों के विवरण किसी भी सरकार को नहीं देते | इन्हें भूमिगत बैंक कहा जाता है, और ऐसे बैंक अंतरराष्ट्रिय काली व्यवस्था को बढ़ावा देते हैं |

कोई भी व्यक्ति काला धन अपने या अपने किसी रिश्तेदार, कंपनी या ट्रस्ट के नाम पर रख सकता है | इसीलिए मौजूदा कानूनों के तहत देश के बहार काले धन की सही जानकारी मिलना बहुत कठिन है |

6. काले धन को “राष्ट्रिय संपत्ति” घोषित करना

हमारे पास ऐसे कानून पहले से ही मौजूद हैं जो भारत के बहार वाले काले धन को राष्ट्रीय संपत्ति बना देते हैं |  कैसे ?  क्यूंकि अगर किसी व्यक्ति ने अपने पिछले 6 साल की कमाई के बारे में कोई जानकारी नहीं दी और उस पर टैक्स भी नहीं भरा तो उसका बकाया टैक्स जमा ब्याज जमा जुर्माना, कुल मिला कर उसकी कमाई से ज्यादा हो जाता है | लेकिन, उसकी 6 साल से पहले कमाई गयी रकम के बारे में कुछ नहीं कर सकते | इस कानून में संशोधन किया जा सकता है ताकि उस व्यक्ति को उसकी सारी पूंजी (भारत में और भारत के बहार) की घोषणा करने के लिए कहा जा सके और एक सीमा के बाद, अघोषित पूंजी पर जुर्माना लगाया जा सकता है | इसके बारे में बाद में चर्चा की गयी है |

7. भारत के अंदर का काला धन कम करना


निम्नलिखित कानूनों के द्वारा भारत के अंदर काला धन कम किया जा सकता है –
7.1. प्रतिस्पर्धात्मक  संपत्ति का खरीदना-बेचना  (संपत्ति खरीदने का मुकाबला) :

जब भी खरीददार-बेचने वाला जमीन बेचेंगे (या अपना दूसरा फ्लैट) , तो संपत्ति की असली बेचने का मूल्य , मतलब कितना पैसा सफ़ेद में दिया गया है वो सरकार की एक वेबसाइट पर डाली जायेगी | और यदि संपत्ति बेचने के 30 दिन के अंदर यदि, कोई तीसरी पार्टी (दल) यदि सरकार को 25% ज्यादा देता है , तो सरकार खरीदने वाले को 20% जादा देगा उ जमन उस तीसरे दल को दे देगा | कृपया इस प्रक्रिया की अधिक जानकारी के लिए नीचे देखें |

7.1.1 संपत्ति की खरीददारी-बेचने’ में ज्यादा कीमत देना ताकि इसमें काला धन का उपयोग कम हो जाए

ये निम्नलिखित ड्राफ्ट है जो भारतीय राजपत्र में डालने के लिए मैंने प्रस्तावित किया है ताकि संपत्ति को खरीदने-बेचने में काले धन का प्रयोग कम हो जाये –

1. ये नियम उस फ्लैट पर नहीं लागू होगा, जब फ्लैट बेचने वाले के पास केवल एक ही फ्लैट हो और खरीदने वाले के पास भी एक ही फ्लैट हो और उस फ्लैट का क्षेत्र-फल 1500 वर्ग फूट से कम हो और उस फ्लैट की कीमत सर्किल दर (जंत्री मूल्य) के समान हो | ऐसे मामलों में, कलेक्टर संपत्ति के खरीदने के लिए कोई भी दूसरा प्रस्ताव नहीं लेगा (जो आगे के धाराओं में बताया गया है)
2. यदि कोई व्यक्ति ने `क` रुपयों का प्लाट/फ्लैट ख़रीदा है, तो उस संपत्ति के सारे विवरण और उसके बेचने का मूल्य अगले दिन सरकार की सार्वजनिक वेबसाइट पर डाला जायेगा |
3. 30 दिन के अंदर, कलेक्टर (या उसके द्वारा नियुक्त आफ्सर) उस प्लाट/फ्लैट को प्राप्त कर सकता है खरीदने वाले व्यक्ति को (1.15 *`क`) रुपये देकर, केवल तभी जब कोई तीसरा दल (पार्टी) कलेक्टर को वो संपत्ति खरीदने के लिए (1.20*`क`) रुपयों का प्रस्ताव देता है |

4. यदि एक से ज्यादा खरीददार कलेक्टर के पास वो संपत्ति खरीदने का प्रस्ताव देता है, तो कलेक्टर उस खरीददार को चुनेगा जो उसे सबसे ज्यादा संपत्ति खरीदने का लिए प्रस्ताव देता है | मान लीजिए कि बोली लगाने वाले ने [(1.20 + `ख`) * `क`] रुपयों का प्रस्ताव किया वो संपत्ति खरीदने के लिए | तब खरीदने वाले को (1.15 * `क`) रुपये मिलेंगे, कलेक्टर सरकार को (0.05 + `ख`/2) रुपये देगा और उस संपत्ति के प्रारंभिक बेचने वाले को (`ख`/2 * `क`) रुपये मिलेंगे | [ ताकि उस संपत्ति के प्रारंभिक बेचनेवाले की भी रूचि हो काले धन के बारे में जानकारी देने के लिए ]
ये ऊपर का प्रस्तावित भारतीय राजपत्र (सरकारी आदेश) अन्यायपूर्ण या जबरन बिक्री नहीं है | क्योंकि बेचने वाले ने अपनी संपत्ति बेची है , और वो अभी तक खरीदने वाले के नाम पर हस्तांतरित (बदली) नहीं हुई है , इसीलिए खरीदने वाले के अभी तक उसपर अधिकार नहीं है | और यदि संपत्ति की बिक्री में कोई काला धन का उपयोग नहीं हुआ है, तो खरीदने वाले को 30 दिनों के कम समय में 20% मुनाफा होगा — कोई भी वैद्य धंधा इतना लाभदायक नहीं होता |
धारा-1 ये सुनिश्चित करता है कि संपत्ति के छोटे खरीदने वाले और छोटे बेचने वालों को कोई कठिनाई नहीं होगी |
7.1.2 ऊपर दिए गए प्रस्तावित भारतीय राजपत्र की धाराएं जमीन-संपत्ति की बिक्री में काला धन कैसे कम करेंगी ?
मान लीजिए , एक प्लाट का बाजार मूल्य 10 करोड़ है | आज के समय में ऐसे प्लाट 4 करोड़ सफ़ेद धन , मतलब `चैक` और 6 करोड़ काले धन (मतलब नकद रुपये , जो बिक्री के लेखे-जोखे में आएगा ही नहीं) के बदले बेचा-ख़रीदा जायेगा |
एक बार ऊपर लिखित धाराएं भारतीय राजपत्र (सरकारी आदेश) में छप जाती हैं, तो जमीन की बिक्री में ऐसा काला रूपया कम हो जायेगा | क्यों ? क्योंकि यदि किसी खरीदने वाले ने आधिकारिक रूप से जमीन का मूल्य 4 करोड़ घोषित किया है , जबकि उस जमीन का बाजार मूल्य 10 करोड़ है, तो बहुत से बोली लगाने वाले व्यक्ति आ जायेंगे और 10 करोड़ तक बोली लगाएंगे | अभी यदि कोई व्यक्ति 10 करोड़ का प्रस्ताव करता है जमीन खरीदने के लिए , तो प्रस्तावित भारतीय राजपत्र के अनुसार , सरकार बेचने वाले को 4.6 करोड़ देगी और सबसे ज्यादा बोली (प्रस्ताव) लगाने वाले को प्लाट दे देगी | इस तरह खरीदने वाले को 5.6 करोड़ रुपयों का नुकसान होगा |

कुल मिलकर, उअदी कोई खरीदने वाला किसी संपत्ति के बाजार मूल्य का 15% से ज्यादा नकद काला रूपया देता है , तो उसे नुकसान होगा | इस तरह , इस प्रस्तावित भारतीय राजपत्र (सरकारी आदेश) से , नकद मतलब कि काले रुपयों का प्रयोग जमीन-संपत्ति की बिक्री में कम हो जायेगा | जैसे समय बीतेगा, 15% का मार्जिन (अंतर) कम करके 10% किया जा सकता है , बड़े जमीन-संपत्ति की बिक्री के लिए | धारा-1 ये सुनिश्चित करती है कि छोटे खरीदने वालों-बेचने वालों को कोई विलम्ब या कठिनाई नहीं आएगी | बड़े खरीदने वाले, यदि वे इमानदारी से संपत्ति का बाजार मूल्य चेक में, सफ़ेद में , दे रहे हैं , तो उनको भी कोई चिंता करने की जरुरत नहीं है |
7.2. बाजार मूल्य पर 1% सम्पत्ति-कर, यदि 25 वर्ग मीटर प्रति व्यक्ति से ज्यादा जमीन हो तो :

ये संपत्ति-कर जमीन की जमाखोरी को कम करेगा और इससे काले धन को जमीन के रूप में जमा करने की प्रवृत्ति (रुझान) कम होगी |
7.3. बड़े नोट को रद्द करना : 500 और 1000 के नोट को कम करना और अंत में रद्द करना

नोट- ये केवल 1-2% काला धन कम करेगा और केवल 1-2% भ्रष्टाचार कम करेगा |
भ्रष्टाचार कम करने के लिए हमें दूसरे उपाय जैसे पारदर्शी शिकायत / प्रस्ताव प्रणाली , प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, सांसद, विधायक, जज , दूसरे मुख्य अफसर आदि पर राईट टू रिकाल , सेना और नागरिकों के लिए खनिज रोयल्टी, संपत्ति-कर, जूरी सिस्टम आदि क़ानून-ड्राफ्ट चाहिए | इनका विवरण कृपया www.righttorecall.info/301.h.pdf में देखें |

7.4. व्यक्तिगत स्तर पर सभी प्लाट और प्लाट के मालिकों के नाम इन्टरनेट पर डालना :
सभी प्लाट के मालिकों के नाम इन्टरनेट पर डालें जायेंगे और सभी ट्रस्ट और कंपनियों के नाम भी इंटनेट पर डालें जायेंगे, जिनके पास जमीन है | इस तरह, कोई भी व्यक्ति अपनी जमीन को छुपा नहीं सकता है |

7.5. (आयकर छूट में खर्चे के) प्राप्तकर्ता की आई.डी. की सूचना देना :

यदि कोई धंधा कोई खर्चे को आय-कर में छूट के लिए दावा करता है, तो उस खर्चे के प्राप्तकर्ता की आई.डी. की सूचना भी देनी जरूरी होगी , ताकि आयकर विभाग ये सुनिश्चित कर सके कि प्राप्तकर्ता ने भी इसे अपनी आय में दिखाया है |

संपत्ति-कर की अधिक जानकारी चैप्टर 25, www.righttorecall.info/301.h.pdf में दिया गया है |

8. विदेश में जमा भारत का काला धन भारत वापस लाना



ये आसान कार्य नहीं होगा, क्योंकि हमें विदेशी सरकारों को अपने बैंक के नियमों को बदलने का लिए मजबूर करना होगा | ये काम संयुक्त राष्ट्र में एक प्रस्ताव रख कर और उस प्रस्ताव के लिए विश्व के सभी दूसरे देशों का समर्थन इकठ्ठा करके करना होगा |

यदि मंत्री और अफसर अपना पूरा जोर लगाएं संयुक्त राष्ट्र में प्रस्ताव रखने और दूसरे देशों को राजी करने के लिए, तब ये संभव है कि संयुक्त राष्ट्र में एक प्रस्ताव पारित किया जा सके , जो दूसरे काले धन को पनाह देने वाले देशों को अपने बैंक के क़ानून बदलने के लिए मजबूर करे |

अभी विदेशी सरकारें और विदेशी बैंक , काला धन भारत वापिस लाने के लिए उत्तरदायी अफसरों या मंत्रियों को रिश्वत देकर खरीदना का प्रयत्न कर सकते हैं | ये सुनिश्चित करने के लिए कि हमारे मंत्री और अफसर बिके नहीं , हम आम-नागरिकों के पास ऐसी प्रक्रिया होनी चाहिए जिसके द्वारा हम आम-नागरिक उनको बदल सकें / सज़ा दे सकें , जैसे ही हमें लगे कि वे बिक गए हैं या उनके कार्य क्षमता में भारी गिरावट दिखे | दूसरे शब्दों में , यदि हमारे पास प्रधान मंत्री, दूसरे मंत्री और मुख्य अफसरों पर राईट टू रिकाल नहीं होगा तो , अधिक संभावना है कि वे अफसर, मंत्री आदि बिक जायेंगे |  सीधे शब्दों में मैं कहूँगा कि यदि नए प्रशासन में यदि राईट टू रिकाल और पारदर्शी शिकायत / प्रस्ताव प्रणाली नहीं होगी, तो उस प्रशासन के अफसर/मंत्री उसी समय बिक जायेंगे जब वे सत्ता में आयेंगे और काला धन वापिस लाने के लिए कुछ भी नहीं करेंगे |

मैं ये निम्नलिखित क़ानून-ड्राफ्ट का प्रस्ताव करता हूँ , जो मैं प्रस्ताव करता हूँ काला धन भारत वापिस लाने के लिए –
8.1. BBMB.01 – पारदर्शी शिकायत / प्रस्ताव प्रणाली (देखिये चैप्टर 1, सैक्शन-1.3, http://www.righttorecall.info/301.h.pdf)

8.2. BBMB.02 – राईट टू रिकाल प्रधानमंत्री – देखें चैप्टर 6, www.righttorecall.info/301.h.pdf

8.3. BBMB.03 – राईट टू रिकाल-विदेश मंत्री – इसका ड्राफ्ट राईट टू रिकाल-रिसर्व बैंक गवर्नर के सामान है (देखें चैप्टर 9, www.righttorecall.info/301.h.pdf) ये ड्राफ्ट ये सुनिश्चित करेगा कि विदश मंत्री फूर्ती से काम करे ताकि संयुक्त राष्ट्र में एक प्रस्ताव पारित हो सके, जो स्विट्ज़रलैंड, मॉरिशस आदि काला धन को पनाह देने वाले देश को मजबूर करे कि वे अपने बैंक के क़ानून बदलें |

8.4. BBMB.04 – राईट टू रिकाल-संयुक्त राष्ट्र भारतीय राजदूत – राईट टू रिकाल-रिसर्व बैंक गवर्नर के ड्राफ्ट के समान इसका ड्राफ्ट है | ये ड्राफ्ट ये सुनिश्चित करेगा कि विदश मंत्री फूर्ती से काम करे ताकि संयुक्त राष्ट्र में एक प्रस्ताव पारित हो सके, जो स्विट्ज़रलैंड, मॉरिशस आदि काला धन को पनाह देने वाले देश को मजबूर करे कि वे अपने बैंक के क़ानून बदलें |

8.5. BBMB.05 – राईट टू रिकाल-प्रवर्तन निदेशालय, अध्यक्ष (सरकारी संस्था जो देश के लिए आर्थिक क़ानून लागू करने और आर्थिक अपराध लड़ने का काम लागू करती है = आर्थिक निर्देश देने वाला कार्यालय) –

सभी विदेशी संपत्ति सम्बंधित अपराध प्रवर्तन निदेशालय द्वारा निपटाए जाते हैं , जो कि वित्त मंत्री के नीचे एक विभाग है | इस विभाग के अध्यक्ष पर राईट टू रिकाल आवश्यक है ये सुनिश्चित करने के लिए कि वो फुर्ती से जानकारी इकट्ठी करे और आरोपी पर कारवाई कर सके |

8.6. BBMB.06 – प्रवर्तन निदेशालय के अंदर जूरी सिस्टम

ये ड्राफ्ट जूरी सिस्टम के ड्राफ्ट के समान है जो चैप्टर 21, www.righttorecall.info/301.h.pdf में दिया गया है | प्रवर्तन निदेशालय का ड्राफ्ट आवश्यक है एक बिना किसी सांठ-गाँठ/मिली-भगत का माहौल को बनाने के लिए , ताकि दूसरे देशों में काला धन रखने के आरोपी पर फुर्ती से , न्यायपूर्वक कारवाई हो सके |

8.7. BBMB.07 – नार्को जांच, पब्लिक में, बहुमत आम-नागरिकों की स्वीकृति द्वारा

इसके पूरे ड्राफ्ट और नार्को जांच पर अकसर पूछे जाने वाले प्रश्नों के लिए http://tiny.cc/xt12iw देखें | इस ड्राफ्ट का उपयोग करके आम-नागरिक बहुत धनवान, राजनीति में वरिष्ठ और शक्तिशाली नेताओं का नार्को जांच करवा सकते हैं |

8.8. BBMB.08 – जूरी के सहमति द्वारा ब्रेन मैपिंग और नार्को पोलीग्राफ

इस ड्राफ्ट का उपयोग करके , जूरी सदस्य उन लोगों का नार्को पोलीग्राफ जांच और ब्रेन मैपिंग कर सकते हैं , जिनके खिलाफ काला धन रखने के लिए प्रथम दृष्टि में कुछ सबूत हैं |

8.9. BBMB.09सभी आम-नागरिकों को कहना कि अपनी इच्छा से देश के बाहर अपना काला धन घोषित करें और यदि वो काला धन कोई गैर कानूनी धंधे से नहीं बनाया गया है (केवल टैक्स की चोरी करके पैदा हुआ है) तो 50% घोषणा करने वाले उस व्यक्ति को मिलेगा और 50% सरकार को जायेगा | सरकार को जाने वाले काले धन में से आधा , मतलब 25% सभी आम-नागरिकों को बराबर-बराबर बांटा जायेगा | यदि वो काला धन, रिश्वत या अपराध द्वारा पैदा किया गया है, तो पूरा का पूरा काला धन जब्त कर लिया जायेगा |

8.10. BBMB.10 – सभी विदेशी पूंजी निवेशों को स्थगित करना जब तक निवेशों के मालिकों के नाम की घोषणा नहीं की जाती –

भारत सरकार सभी विदेशी पूंजी-निवेशों को स्थगित कर सकती है , जब तक वे पूंजी-निवेशों के मालिकों के नाम की घोषणा नहीं की जाती है |

8.11. BBMB.11 – संयुक्त राष्ट्र में एक प्रस्ताव पारित करना, जो सभी देशों से कहे कि अपने-अपने देश में सभी ट्रस्ट के ट्रस्टी (न्यासी) के नाम और भी पंजीकृत (रजिस्तरीकृत) कंपनियों के मालिकों के नाम घोषित करें |

8.12. BBMB.12 – संयुक्त राष्ट्र में एक प्रस्ताव पारित करना, जो सभी देशों से कहे कि अपने-अपने देशों के बैंकों को आदेश दे कि भारतीय नागरिकों या भारतीय मूल के नागरिकों के नाम (जमा धन का ब्यौरा नहीं) घोषित करें जिनके खाते उन बैंकों में हैं | और सभी देश उन ट्रस्ट और कंपनियों के नाम भी घोषित करें, जिनके ट्रस्टी या निर्देशक या मालिक भारतीय हैं | और सभी देश अनुरोध करने पर निश्चित खातों की घोषणा करें |

8.13 BBMB.13 –

1. भारतीय राजपत्र में डालो कि कोई भी व्यक्ति अपनी इच्छा से, पब्लिक नार्को जांच में दे सकता है, फिर नार्को जांच अधिकारी उसकी नार्को जांच पब्लिक में करेंगे |

2. प्रश्न जूरी द्वारा पूछे जायेंगे और उसमें वे प्रश्न भी होंगे, जो उस व्यक्ति ने स्वयं दिए हैं | और नार्को-जांच द्वारा मिली जानकारी की पुष्टि की     जायेगी | ऐसी जानकारी से यदि काले रुपये या काले डॉलर या काला धन मिलता है, तो जो व्यक्ति सूचना दे रहा है और जिसपर पब्लिक में नार्को-जांच हुई है, तो उस व्यक्ति को सरकार द्वारा मिली कुल राशि का 20% मिलेगा |

3. और यदि काले धन सम्बंधित जानकारी एक से अधिक लोगों से मिली है, तो पैसों का बंटवारा जूरी तय करेगी और जूरी ये सुनिश्चित करेगी     कि जिस व्यक्ति ने पहल जानकारी दी है और ज्यादा महत्वपूर्ण जानकारी दी है, उससे ज्यादा हिस्सा मिले |

ये ड्राफ्ट भ्रष्ट मंत्रियों, अफसरों या एजेंटों , जिनके पास काला धन है, उनके कर्मचारियों आदि को प्रेरित करेगा कि वो विश्वसनीय जानकारी दे और अपना हिस्सा प्राप्त करें | ऐसे में सरकारी अफसर झूठी जानकारी देकर समय बरबाद नहीं कर सकते  

9. प्रस्तावित ड्राफ्ट्स पास कराने का तरीका :

 

विशेषकर BBMB.01 – पारदर्शी शिकायत / प्रस्ताव प्रणाली, BBMB.02 – राईट टू रिकाल प्रधानमंत्री, BBMB.05 – राईट टू रिकाल-प्रवर्तन निदेशालय, अध्यक्ष, BBMB.06 – प्रवर्तन निदेशालय के अंदर जूरी सिस्टम, BBMB.07 – नार्को जांच, पब्लिक में, बहुमत आम-नागरिकों की स्वीकृति द्वारा, ये छे ड्राफ्ट बहुत महत्पूर्ण हैं |
BBMB.01 से BBMB.10 — ये ड्राफ्ट्स प्रधानमंत्री द्वारा एक दिन में राजपत्र में छापकर लाये जा सकते हैं और इनको पूरी तरह से लागू करने के लिए 30 दिन से कम समय लगेगा | इससे भारत के अंदर काला धन, आज के मुकाबले 10% से भी कम हो जायेगा |

BBMB.11 और BBMB.12 – इन ड्राफ्टों के लिए विदेश मंत्री और भारत के राजदूत को संयुक्त राष्ट्र में पास कराने के लिए काम करना होगा | उसके लिए उन्हें उन सारे देशों में अभियान चलाना होगा जहाँ स्विस बैंकों और काला धन की वजह से नुकसान होता है | ये थोड़ी लम्बी प्रक्रिया है —- इसमें एक साल या दो साल लगभग समय लग सकता है

10. काला धन प्राप्त करना

बहुमत की स्वीकृति द्वारा, पब्लिक में नार्को टेस्ट की प्रक्रिया का उपयोग करके, आम-नागरिक उन शक्तिशाली नेताओं का नार्को जांच करवा सकते हैं जिनपर आम-नागरिकों को बहुत ज्यादा भ्रष्टाचार करने का शक है |

नार्को टेस्ट के समय, वो बहुत से सांसदों, जजों, मंत्रियों, भारतीय सेवाकर्मी (आई.ए.एस) , पुलिसकर्मी (आई.पी.एस.) अधिकारीयों और बड़े व्यापारियों के नाम बोल देंगे जिनके विदेशी गुप्त खाते हैं | इन नार्को टेस्ट को प्रमाण की तरह न लेकर, इसके आधार पर आगे की कार्यवाही कर जानकारी हासिल की जा सकती है | विदेशी गुप्त खातों के नाम, आदि विवरण के आधार पर, भारत की सरकार उन विदेशी बैंकों से उन व्यक्तियों के या उनके ट्रस्ट या उनके कंपनियों के बैंक स्टेटमेंट्स (ब्यौरा) मांग सकती है | उसके बाद, उन व्यक्तियों को काला धन लाने के लिए मजबूर किया जा सकता है या सरकार विदेशी बैंक को पैसा भारत सरकार को देने को कह सकती है |

जब BBMB.11 और BBMB.12  संयुक्त राष्ट्र में पास हो जायेंगे, तब भारतीय नागरिकों के विदेशी गुप्त खातों के बारे में जानकारी आसानी से मिल सकती है और उस जानकारी का उपयोग करके काले धन को आसानी से वापस लाया जा सकता है |

11. प्राप्त काले धन का आवंटन (बांटना)

मेरे प्रस्तावित ड्राफ्ट के अनुसार, अगर किसी व्यक्ति का विदेश में काला धन है तो:

11.1. यदि जूरी ये निष्कर्ष पर आती है कि वो पैसा वैध व्यापार करके कमाया गया है, नाकि भ्रष्टाचार या अपराध करके, तो उसका मालिक 50% रख सकता है और बाकि 25% सेना को जायेगा और 25% आम-नागरिकों में बराबर-बराबर बाँट दिया जायेगा |

11.2. यदि जूरी ये निष्कर्ष पर आती है कि वो पैसा अवैध रूप से भ्रष्टाचार या अपराध करके कमाया गया है, तो मालिक को कुछ नहीं मिलेगा और 50% सेना को जायेगा और 50% आम-नागरिकों में बराबर-बराबर बाँट दिया जायेगा | और मालिक को 15 साल तक कारावास की सजा हो सकती है, जैसे कि जूरी सदस्यों द्वारा निर्णय किया जायेगा |

12. बिना राईट टू रिकॉल के काला धन वापस लाना :

यदि प्रधान मंत्री, विदेश मंत्री, या किसी मुख्य अधिकारी पर कोई राईट टू रिकाल नहीं है, तो वो सबसे पहले अपना खुद का खाता स्विस बैंक में खोलेंगे | या फिर वो विदेशी प्रभाव या शक्तिशाली, उच्च वर्ग के लोगों के प्रभाव में काम करेंगे | इसीलिए महत्वपूर्ण पदों पर राईट टू रिकाल ज़रूरी है | राईट टू रिकाल के अभाव में काला धन भारत वापस लाना और आम-नागरिकों के हित के लिए उपयोग करना सिर्फ एक सपना बनकर रह जायेगा |

इन क़ानून-ड्राफ्ट को हम जन-आन्दोलन द्वारा ला सकते हैं | पूरी प्रक्रिया के लिए कृपया चैप्टर 13,14,15, www.righttorecall.info/301.h.pdf देखें और

अकसर पूछे जाने वाले प्रश्नों के लिए www.righttorecall.info/004.h.pdf देखें |

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