अध्याय 45 –


                                   यदि खून की नदियां नहीं , तो खून की कुछ बूंद बह सकती हैं

(45.1) ‘जनता की आवाज़ पारदर्शी शिकायत / प्रस्ताव प्रणाली (सिस्टम)’  के खिलाफ इतनी शत्रुता / दुश्‍मनी क्‍यों?

जैसा कि हम लोगों में से अधिकांश लोग जानते हैं कि भारत की शीर्ष राजव्‍यवस्‍था और प्रशासनिक व्‍यवस्‍था लगभग 10,000 विशिष्ट/उच्च लोगों द्वारा चलाई जाती है, जिसमें से अधिकांश विशिष्ट/उच्च लोग अब विदेशी विशिष्ट/उच्च लोगों के हितों के लिए काम करते हैं। यदि ‘नागरिक और सेना के लिए खनिज रॉयल्टी (एम. आर. सी. एम.) कानून लागू हो जाए तो 10000 देशी/विदेशी विशिष्ट/उच्च लोगों के हाथों से खनिजों की रॉयल्‍टी(आमदनी) निकलकर नागरिकों के हाथों में आ जाएगी। इससे विशिष्ट/ऊंचे लोग कमजोर होंगे और आम आदमी की ताकत बढ़ेगी। इसी प्रकार, प्रजा अधीन राजा/राईट टू रिकाल (भ्रष्ट को बदलने का अधिकार) कानून से विशिष्ट/उच्च लोगों की मंत्रियों, अधिकारियों, जजों आदि को घूस देने की अधिकार/क्षमता कम हो जाएगी। इससे विशिष्ट/उच्च लोगों की ताकत एक बार फिर घटेगी। अब ‘जनता की आवाज़ पारदर्शी शिकायत/प्रस्ताव प्रणाली(सिस्टम)’ का सहारा लेकर 3 से 4 महीने के भीतर ही ‘नागरिक और सेना के लिए खनिज रॉयल्टी(आमदनी) (एम. आर. सी. एम.), प्रजा अधीन राजा/राईट टू रिकाल (भ्रष्ट को बदलने का अधिकार) कानून लागू कर/करवा दिए जाएंगे। और इसलिए विशिष्ट/उच्च लोग ‘जनता की आवाज़ पारदर्शी शिकायत/प्रस्ताव प्रणाली(सिस्टम)’ से नफरत/घृणा करते हैं।

अब जैसा कि हम लोगों में से अधिकांश लोग यह जानते हैं कि सभी मुख्‍यमंत्री और प्रधानमंत्री इन 10000 विशिष्ट/उच्च लोगों के खिलौने हैं, वे खुद भी इन विशिष्ट/उच्च लोगों में से कोई एक हो सकते हैं। ये लोग इन 10000 विशिष्ट/उच्च लोगों की सामूहिक इच्‍छा/हितों के खिलाफ कहीं किसी भी कागजात पर हस्‍ताक्षर नहीं कर सकते। ये बुद्धिजीवी लोग बड़े लालची होते हैं और आर्थिक मदद(अनुदान) चाहते हैं, इसलिए अधिकांश बुद्धिजीवी लोग इन विशिष्ट/उच्च लोगों के हितों को साधने के लिए पूरी ताकत से काम करते हैं। विशिष्ट/उच्च लोग ‘जनता की आवाज़ पारदर्शी शिकायत/प्रस्ताव प्रणाली(सिस्टम)’ से नफरत करते हैं और लगभग सभी बुद्धिजीवी लोग ‘जनता की आवाज़ पारदर्शी शिकायत/प्रस्ताव प्रणाली(सिस्टम)’ से नफरत करते हैं। और अधिकांश विधायक, सांसद, मुख्‍यमंत्री, प्रधानमंत्री आदि भी ऐसा ही करते हैं। नफरत/घृणा इसका कारण नहीं है बल्‍कि इसका कारण है कि यदि ‘जनता की आवाज़ पारदर्शी शिकायत/प्रस्ताव प्रणाली(सिस्टम)’ लागू हो जाएगी तो विशिष्ट/उच्च लोग घूस के जरिए और खनिजों के जरिए जो आय प्राप्‍त करते हैं, उसका 95 प्रतिशत उनके हाथ से निकल जाएगा।

(45.2) तो क्‍या विशिष्ट / उच्च लोग , मंत्री, आई.ए.एस. (सरकारी बाबू) बिना एक भी बूंद खून बहाए हथियार डाल देंगे?

मैं `राईट टू रिकाल ग्रुप`/`प्रजा अधीन राजा समूह` के सदस्‍य के रूप में प्रधानमंत्री, मुख्‍यमंत्रियों के सामने ‘जनता की आवाज़ पारदर्शी शिकायत/प्रस्ताव प्रणाली(सिस्टम)’ का केवल तीन लाईन के ड्राफ्ट का प्रस्‍ताव करता हूँ। मेरी और कोई मांग नहीं है। मैं ‘नागरिक और सेना के लिए खनिज रॉयल्टी (एम. आर. सी. एम.) अथवा प्रजा अधीन राजा/राईट टू रिकाल (भ्रष्ट को बदलने का अधिकार) कानून अथवा कुछ भी और नहीं मांग रहा हूँ। ‘नागरिक और सेना के लिए खनिज रॉयल्टी (एम. आर. सी. एम.)`, `प्रजा अधीन राजा/राईट टू रिकाल (भ्रष्ट को बदलने का अधिकार)` आदि कानून लागू करवाना तब नागरिकों से मेरा विनती/अनुरोध होगा जब एक बार प्रधानमंत्री ‘जनता की आवाज़ पारदर्शी शिकायत/प्रस्ताव प्रणाली(सिस्टम)’ ड्राफ्ट पर हस्‍ताक्षर करने की मांग मान लें।

और ‘जनता की आवाज़ पारदर्शी शिकायत/प्रस्ताव प्रणाली(सिस्टम)’ केवल यही कहती है कि “जनता को उनकी शिकायतें प्रधानमंत्री की वेबसाईट पर डालने (की अनुमति) दी जाए।”

तो क्‍या इतनी छोटी मांग खून खराबा करेगी?

क्‍या विशिष्ट/उच्च लोग बिना किसी खून खराबे के प्रधानमंत्री और मुख्‍यमंत्रियों को ‘जनता की आवाज़ पारदर्शी शिकायत/प्रस्ताव प्रणाली(सिस्टम)’ प्रारूप पर हस्‍ताक्षर करने  दे देंगे?

(45.3) मेरा विचार

मैं कोई खून खराबा नहीं चाहता, लेकिन यह आशा करता हूँ कि विशिष्ट/उच्च लोग खनिजों से होनेवाली आय नागरिकों के लिए छोड़ देंगे और मंत्री आदि हिंसा का सहारा लिए बिना घूस से होनेवाली आय छोड़ देंगे। यह इतनी अच्‍छी बात है कि सच हो ही नहीं सकती है। मैं केवल प्रधानमंत्री, मुख्‍यमंत्रियों पर जनता द्वारा दबाव डलवाकर ही ‘जनता की आवाज़ पारदर्शी शिकायत/प्रस्ताव प्रणाली(सिस्टम)’ लागू करवाना चाहता हूँ। मैं नहीं चाहता कि कोई नागरिक किसी प्रधानमंत्री, मुख्‍यमंत्री विधायक, सांसद और आई.ए.एस., आई.पी.एस., जज, विशिष्ट/उच्च लोगों आदि के खिलाफ किसी प्रकार की हिंसा करें। और मेरी कामना है कि प्रधानमंत्री, मुख्‍यमंत्री विशिष्ट/उच्च लोग आदि भी हम ‘जनता की आवाज़ पारदर्शी शिकायत/प्रस्ताव प्रणाली(सिस्टम)’ कार्यकर्ताओं के खिलाफ हिंसा का प्रयोग न करें। लेकिन विशिष्ट/ऊंचे लोग ‘जनता की आवाज़ पारदर्शी शिकायत/प्रस्ताव प्रणाली(सिस्टम)’ कार्यकर्ताओं के खिलाफ हिंसा का प्रयोग करने का फैसला/निर्णय करते हैं तब भी मैं ‘जनता की आवाज़ पारदर्शी शिकायत/प्रस्ताव प्रणाली(सिस्टम)’ कार्यकर्ताओं से हिंसा का प्रयोग न करने का ही अनुरोध करूंगा लेकिन मैं नहीं कह सकता कि तब क्‍या होगा?

अभी की स्‍थिति के अनुसार मेरा ऐसा मान लेता हूँ कि विशिष्ट/उच्च लोग, मंत्रियों आदि की ओर से कोई हिंसा नहीं होगी और इसलिए नागरिकों की ओर से भी कोई हिंसा नहीं होनी चाहिए। यदि विशिष्ट/उच्च लोग, मंत्री आदि हिंसा का सहारा लेते हैं तब हम नागरिकों को भी फिर से विचार करने की जरूरत होगी।

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