अध्याय 42


बिजली बनने (पैदावार) और सप्लाई (आपूर्ति) में सुधार करने के लिए `राईट टू रिकाल ग्रुप`/`प्रजा अधीनराजा समूह’ के प्रस्‍ताव
(42.1) बिजली बनने (पैदावार) और सप्लाई (आपूर्ति) में सुधार करने के लिए प्रस्‍तावों की सूची (लिस्ट)

1.    प्रजा अधीन – केन्‍द्रीय बिजली (बिजली(विद्युत)) मंत्री, प्रजा अधीन – राज्‍य बिजली(बिजली(विद्युत)) मंत्री, प्रजा अधीन–केन्‍द्रीय बिजली(बिजली(विद्युत)) प्रबंध-कर्ता/नियामक/नियंत्रक, प्रजा अधीन – राज्‍य बिजली(विद्युत) प्रबंध-कर्ता/नियामक/नियंत्रक ।
2.    बिजली कटौती को कम करने के लिए बिजली खपत पर समान भत्ता(मासिक राशन;जो नियमित अंतराल पर दी जाती है) प्रणाली(सिस्टम)
3.    कैसे ‘नागरिक और सेना के लिए खनिज रॉयल्टी (एम. आर. सी. एम.)’ कानून बिजली खपत/उपभोग में सुधार लाएगा ?
4.    कैसे प्रजा अधीन – जज और जूरी प्रणाली(सिस्टम) बिजली बनाने में सुधार लाएगा?
(42.2) प्रजा अधीन – बिजली नियामक / प्रबंधकर्ता , प्रजा अधीन – मंत्री
बिजली के क्षेत्र में चार व्‍यक्‍ति महत्‍वपूर्ण भूमिका निभाते हैं – केन्‍द्रीय बिजली(विद्युत) नियामक, राज्‍य बिजली(विद्युत) नियामक, केन्‍द्रीय बिजली(विद्युत) मंत्री और राज्‍य बिजली(विद्युत) मंत्री। नागरिकों से मेरा अनुरोध है कि वे प्रधानमंत्री व मुख्‍यमंत्री पर ‘जनता की आवाज़ पारदर्शी शिकायत/प्रस्ताव प्रणाली(सिस्टम) ’ पर हस्‍ताक्षर करने का दबाव डालें और तब ‘जनता की आवाज़ पारदर्शी शिकायत/प्रस्ताव प्रणाली(सिस्टम) ’ का प्रयोग करके नागरिकों को चाहिए कि वे प्रजा अधीन – राज्‍य बिजली(विद्युत) मंत्री, प्रजा अधीन – केन्‍द्रीय बिजली(विद्युत) मंत्री, प्रजा अधीन – राज्‍य बिजली(विद्युत) नियामक और प्रजा अधीन – राष्‍ट्रीय बिजली(विद्युत) नियामक लागू कराएं। इसके अलावा ‘जनता की आवाज़ पारदर्शी शिकायत/प्रस्ताव प्रणाली(सिस्टम) ’ का प्रयोग करके नागरिकों को सरकारी मालिकी(स्वामित्व) वाली बिजली कम्‍पनियों पर जूरी प्रणाली(सिस्टम) भी लागू करानी चाहिए। इससे कर्मचारियों में भ्रष्‍टाचार कम होगा, चोरी कम होगा और रख रखाव की कमी दूर होगी।
(42.3) कोई बिजली कटौती नहीं और सभी के लिए 24 घंटे बिजली : बिजली पर भत्‍ता (मासिक बिजली राशन) प्रणाली (सिस्टम)
इस समस्‍या का समाधान करने के लिए मैं किस प्रकार का प्रस्‍ताव कर रहा हूँ?
भारत में अधिकारियों ने जानबूझकर कई गावों में बिजली के तार नहीं लगवाए हैं। ऐसा इसलिए है कि यदि इन ग्रामीण क्षेत्रों के लोग बिजली प्राप्‍त करना शुरू कर देंगे तो शहर के विशिष्ट/ऊंचे लोगों को कम बिजली से गुजारा करना पड़ेगा। साथ ही कई क्षेत्रों में विशिष्ट/ऊंचे लोग बिजली की कटौती (लोड-शेडिंग) करवाकर गरीबों के क्षेत्र में बिजली सप्लाई (आपूर्ति) काटवा देते हैं ताकि धनी (विकसित) क्षेत्र में रहने वाले इन विशिष्ट/ऊंचे लोगों को उनके अपने लिए ज्‍यादा बिजली मिल सके।
एक बार यदि हम प्रजा अधीन – बिजली मंत्री लागू कर सकें तो भारत भर में सभी क्षेत्रों में बिजली की कटौती(लोड शेडिंग) एक समान हो जाएगा। लेकिन इससे समस्‍या कम नहीं होगी। यदि संभव हो तो हमें बिजली कि कटौती (लोड शेडिंग) से 2 या 3 महीनों में ही छुटकारा पाना होगा। हम बिजली-घरों (पावर प्‍लॉन्‍टों) की संख्‍या बढ़ाना शुरू कर दें। लेकिन बिजली-घरों(पावर प्‍लांट) बनने में कुछेक वर्ष का समय लग जाएगा। इससे भी बड़ी समस्‍या बिजली के लिए कोयला आदि प्राप्‍त करना है। कच्‍चे इंधन की समस्‍या के समाधान की कोई गारंटी नहीं है। इसलिए मैं एक ऐसी स्‍थिति लाने के लिए कौन सा प्रस्‍ताव कर रहा हूँ जिसमें भारत भर में कम से कम बिजली कटौती हो। मेरा प्रस्‍ताव है कि नागरिकों को ‘जनता की आवाज़ पारदर्शी शिकायत/प्रस्ताव प्रणाली (सिस्टम) ’ का प्रयोग करके निम्‍नलिखित प्रणाली(सिस्टम)  लागू करवानी चाहिए –
1.    नागरिक ‘जनता की आवाज़ पारदर्शी शिकायत/प्रस्ताव प्रणाली(सिस्टम) ’ प्रक्रिया का प्रयोग करके केन्‍द्रीय बिजली(विद्युत) मंत्री और राज्‍य बिजली मंत्री को नागरिकों द्वारा बदल सकने वाली प्रक्रियाएँ ला सकते हैं।
2.    केन्‍द्रीय बिजली मंत्री केन्‍द्र सरकार के अधीन आनेवाले बिजली-घर (पावर प्‍लांट) से प्रति नागरिक बिजली की जो पैदावार है,उसकी अनुमानित मात्रा बताएँगे ।
3.    केन्‍द्र सरकार का इसमें एक तिहाई हिस्‍सा होगा और बाकी को नागरिकों में इस प्रकार बांटा जाएगा कि जहां बिजली-घर(पॉवर-प्लांट) हैं, वहां के राज्यों के नागरिकों को दोगुना हिस्‍सा मिलेगा और अन्‍य राज्‍यों के नागरिकों को शेष हिस्‍सा मिलेगा।
4.    उदाहरण : मान लीजिए, केन्‍द्र सरकार के मालिकी(स्वामित्व) वाले बिजली के प्‍लांट से अनुमानित पैदावार, आनेवाले महीने में 1000 मिलियन यूनिट होगा। तब लगभग 333 मिलियन यूनिट केन्‍द्र सरकार को जाएगा। शेष 667 मिलियन यूनिट नागरिकों को मिलेगा। मान लीजिए कि किसी राज्‍य में 10 करोड़ नागरिक हैं और वहाँ पर बिजली-घर हैं और शेष भारत में 105 करोड़ नागरिक हैं। तब उस राज्‍य में प्रत्‍येक नागरिक को 1.06 यूनिट मिलेगा और उस राज्‍य से बाहर के नागरिक को 0.53 यूनिट मिलेगा।
5.    राज्‍य बिजली(विद्युत) मंत्री राज्‍य सरकार के अंतर्गत आनेवाले बिजली-घर(पावर प्‍लांट) से प्रति नागरिक पैदावार की अनुमानित मात्रा बताएंगे।
6.    राज्‍य सरकार को इसका एक तिहाई हिस्‍सा मिलेगा और शेष हिस्‍सा नागरिकों को इस अनुपात में बांटा जाएगा कि जिस जिले में बिजली-घर(पॉवर-प्लांट) स्‍थित होगा वहां के नागरिकों को अन्‍य जिलों के नागरिकों के हिस्‍से से दोगुना मिले।
7.    कोई प्राइवेट/निजी बिजली(विद्युत) पैदा करने वाला(उत्‍पादनकर्ता) बंधुआ कारखाने (कैप्टिव संयत्र ; जो ग्रिड से नहीं जुड़े होते हैं ) सहित ,बिजली के खपत(उपभोग) के अधिकार को उसी प्रकार बांटेगा जैसे राज्‍य सरकार के मालिकी(स्वामित्व) वाले बिजली पैदावार(उत्‍पादक) बांटते हैं।
8.     यदि किसी व्‍यक्‍ति के पास उसके घर में बिजली जेनरेटर है तो यह कानून उस पर लागू नहीं होगा।
9.    कोई नागरिक अपने हिस्‍से को अपने तय किए गए कितने भी भाग/अनुपात में मीटर संख्‍या  अथवा पंजीकृत उपभोक्‍ताओं(खपत करने वाले) को दे सकता है। पंजीकृत उपभोक्‍ता आपस में एक दूसरे को भत्‍ता हस्‍तांतरित कर सकते हैं।
10.   मीटर के बिजली कीउपभोग/खपत की सीमा का निर्णय, इस बात से होगी कि उस मीटर को कुल कितनी बिजली अन्य लोगों ने दी(आवंटन) है ।
11.   उदाहरण : मान लीजिए, कोई मीटर नम्‍बर 1 है। मान लीजिए, पांच नागरिक, जिनमें से प्रत्‍येक को 50 यूनिट का भत्‍ता(मासिक राशन)  मिला हुआ है, उन्‍होंने अपने आवंटित 50 यूनिट में से 50 प्रतिशत यूनिट इस मीटर नम्‍बर 1 को (आवंटित कर) दिया, तब उस मीटर की खपत सीमा 125 यूनिट होगी।
12.   यदि  कोई  मीटर  अपनी  खपत (उपभोग) की  सीमा  से  अधिक  चल/बढ़ जाती  है  तो  सरकार दण्‍ड  लगा  सकती है, जो आम(नियमित) शुल्‍क से 10 गुना ज्‍यादा हो सकता है।
13.   किसी व्‍यक्‍ति को अपनी खपत यूनिट को (अन्‍य) मीटरों और पंजीकृत खरीददारों को बिजली देने/नामित (आवंटित करने) के लिए तलाटी के कार्यालय जाकर उसे अपनी बिजली जो देना चाहता है(आवंटन) इंगित करना/बताना होगा। बिजली , जो देना चाहता है(आवंटन), प्रति वर्ष 1 आवंटन तक नि:शुल्‍क होगा और उसके बाद उस व्‍यक्‍ति को 3 रूपए का शुल्‍क देना पड़ेगा।
14.   राज्‍य/केन्‍द्र सरकार अपनी अपनी यूनिटों को अपने अपने विभागों जैसे सेना, कोर्ट और पुलिस आदि को देगी(आवंटित करेगी)। कितनी यूनिट दी जाएँगी, ये रक्षा-मंत्री, प्रधान-मंत्री और पोलिस विभाग के अध्यक्ष तय करेंगे और कम से कम 51 % नागरिकों की  `जनता की आवाज़- पारदर्शी शिकायत प्रणाली(सिस्टम)` का प्रयोग करके स्वीकृति लेंगे | शेष (यूनिटों) की खुले बाजार में नीलामी की जाएगी।
15.   कोई नागरिक अपनी बिजली यूनिटों को निम्‍नलिखित तरीके से आवंटित कर सकता है:-
किसी खास/विशेष मीटर संख्‍या को क1 यूनिट, किसी अन्‍य विशेष मीटर नम्‍बर को क2 यूनिट और (उपभोग से) ज्‍यादा यूनिट किसी विशेष कंपनी को। यह “मीटर संख्‍या” उसके अपने घर का हो सकता है और/या उसके अपने दुकान का हो सकता है।
16.   यदि कोई नागरिक यह महसूस करता है कि कतिपय/कुछ श्रेणियों के लोगों जैसे खेती- भूमि के मालिक आदि को ज्‍यादा बिजली(आवंटन) मिलना चाहिए तो वह इस क्‍लॉज को एफिडेविट के रूप में प्रस्‍तुत कर सकता है और तब नागरिकगण ‘जनता की आवाज़ पारदर्शी शिकायत/प्रस्ताव प्रणाली(सिस्टम) ’ का प्रयोग करके निर्णय करेंगे अथवा संसद वर्तमान/मौजूदा अथवा नए कानूनों के अनुसार निर्णय करेगी।
17.      अंतिम/वास्‍तविक उपभोक्‍ता(ऐंड यूजर्स) बिजली(विद्युत) प्रभंध-कर्ताओं/नियामकों द्वारा किए गए निर्णय के अनुसार वास्‍तविक रूप में किए गए अपने खर्च/उपभोग के लिए शुल्‍क देगा।
(42.4) सभी के लिए पंखा-ट्यूबलाईट के लिए बिजली अथवा उतनी बिजली के बराबर का नकद

वर्ष 2009 में भारत की प्रति व्‍यक्‍ति प्रति वर्ष बिजली खपत (क्षमता) 612 किलो-वाट थी अर्थात 612 यूनिट थी। एक यूनिट कितना होता है? एक यूनिट एक 60 वाट के ट्यूबलाईट को 16 घंटे या एक 60 वाट के पंखे को 16 घंटे चला सकता है। यदि कोई परिवार एक बल्‍ब प्रतिदिन 8 घंटे और एक पंखा प्रतिदिन 12 घंटे चलाता है तब वह परिवार एक वर्ष में 438 यूनिट उपभोग/खपत करेगा। बिजली के अन्‍य मशीनों/उपकरणों के लिए उन्‍हें निश्‍चित रूप से अधिक बिजली की जरूरत पड़ेगी।
(42.4) सभी के लिए पंखा-ट्यूबलाईट के लिए बिजली अथवा उतनी बिजली के बराबर का नकद
मेरे द्वारा किए गए  “बिजली के लिए समान मासिक राशन” के प्रस्‍ताव में प्रत्‍येक व्‍यक्‍ति के उपभोग/खपत की सीमा है और यह दूसरों को भी हवाले कर सकते हैं। इस प्रकार, कोई व्‍यक्‍ति जिसके घर में बिजली नहीं है अथवा वह बिजली बन्‍द रखता है तो वह अपने खपत/उपभोग के अधिकार को किसी ऐसे व्‍यक्‍ति को बेच सकता है जिसे अधिक यूनिट की जरूरत है। दूसरे शब्‍दों में, बिजली की कटौती(लोड शेडिंग) को बिजली के मूल्‍य में वृद्धि करके इस तरह से न्‍यूनतम किया जाएगा कि केवल उन व्‍यक्‍तियों को इसका अधिक भुगतान करना पड़ेगा जो औसत से अधिक खपत/उपभोग करेंगे और इस अधिक(एक्‍सेस) (खपत) के भुगतान का निर्णय खुले बाजार में (अर्थात प्रत्‍येक नागरिक) द्वारा किया जाएगा और यह पैसा सीधे उन नागरिकों को जाएगा जो कम बिजली की खपत करते हैं।
उदाहरण के लिए, प्रत्‍येक नागरिक प्रति महीने खपत का मासिक राशन(आवंटन)(कम दाम पर बिजली) 40 यूनिट है तब कोई परिवार, जिसे बिजली का कनेक्‍शन नहीं है वह प्रति माह 40 यूनिट बिजली किसी उद्योग को बेच सकता है और बाजार मूल्‍य के बराबर पैसे ले सकता है। मान लीजिए, चार व्‍यक्‍तियों का एक परिवार प्रति दिन 5 घंटे तक एक ट्यूबलाईट और प्रति दिन 12 घंटे एक पंखा उपयोग करता है तो उन्‍हें एक महीने में 30 यूनिट की जरूरत होगी। इसलिए वे 30 यूनिट का उपभोग कर सकते हैं और 130 यूनिट का अधिकार किसी अन्‍य को बेच सकते हैं। इसी प्रकार कोई व्‍यक्‍ति जो प्रति दिन 20 घंटे एयर कंडिशनर(ए.सी) का उपयोग करता है वह एक महीने में 600 यूनिट का उपभोग करेगा। उसे किसी अन्‍य ऐसे व्‍यक्‍ति से 560 यूनिट खरीदने की जरूरत पड़ेगी जो कम खर्च करता है।
इस प्रकार, कैसे इस `समान मासिक बिजली राशन प्रणाली(सिस्टम)` से बिजली कटौती(पावर कट) कम होगी? क्‍योंकि यदि प्रत्‍येक व्‍यक्‍ति उतनी ही बिजली का उपयोग करते हैं जितनी यूनिट उसे मिली है तो पावर कट बिलकुल भी नहीं होगा। अब यह तथ्‍य कि किसी व्‍यक्‍ति को शुल्क का 10 गुना भुगतान करना पड़ेगा, यह पक्का/सुनिश्‍चित करेगा कि वह यूनिट बाजार से खरीदेगा ना कि नियम तोड़कर ज्‍यादा यूनिट का खपत/उपभोग करेगा। अथवा यदि वह यूनिट नहीं खरीद सकता है तो वह खुद ही अपना खपत कम कर देगा। दूसरे शब्‍दों में, कोई मॉल/बड़ी दुकान जो रात दिन 24 घंटे एसी चलाती है तो ऐसा करने के लिए उसका स्‍वागत है लेकिन अच्‍छा होगा यदि वह यूनिट उनसे प्राप्‍त करे जो कम उपभोग कर रहे हैं। यदि कम खपत करने वाले यूनिट दे देने की बजाए ज्‍यादा खपत करने का निर्णय करते हैं तो मॉल को बिजली खपत/उत्‍पादन बढ़ने तक इंतजार करना पड़ेगा।
(42.5) बिजली / ऊर्जा की परिस्थिति में नागरिक और सेना के लिए खनिज रॉयल्टी (एम. आर. सी. एम.)’ से कैसे सुधार होगा ?

‘नागरिक और सेना के लिए खनिज रॉयल्टी (एम. आर. सी. एम.)’ गरीबों की आय बढ़ा देगा। यह उसकी बिजली खरीदने की ताकत/क्षमता बढ़ा देगा। साथ ही ‘नागरिक और सेना के लिए खनिज रॉयल्टी (एम. आर. सी. एम.)’ यह पक्का/सुनिश्‍चित करेगा कि नागरिकों को कच्‍चे तेल, कोयले की रॉयल्‍टी से सीधी आय प्राप्‍त हो। इसलिए यदि बिजली की मांग बढ़ती है और यदि बिजली बनाने/उत्‍पादन करने वाली कम्‍पनी कच्‍चे तेल अथवा कोयले के लिए ज्‍यादा भुगतान करने का निर्णय लेती है तो नागरिकों की आय खुद ही बढ़ जाएगी। इस प्रकार ‘नागरिक और सेना के लिए खनिज रॉयल्टी (एम. आर. सी. एम.)’ यह पक्का/सुनिश्‍चित करता है कि प्रत्‍येक व्‍यक्‍ति कम से कम कुछ बिजली का उपयोग कर पाए।
(42.5) बिजली / ऊर्जा की परिस्थिति में नागरिक और सेना के लिए खनिज रॉयल्टी (एम. आर. सी. एम.)’ से कैसे सुधार होगा ?
(42.6) कैसे प्रजा अधीन – जज बिजली उत्‍पादन में सुधार करेगा?
प्रजा अधीन- जज यह सुनिश्‍चित करेगा कि जज योजनाओं को रोकने/बलॉक करने के लिए रोक(स्‍टे आर्डर) का आदेश नहीं देंगे। उदाहरण के लिए नर्मदा डैम योजना विभिन्‍न जजों द्वारा दिए गए रोक(स्‍टे आर्डर) के कारण 40 वर्षों तक रूका रहा। इसलिए जैसे ही रोक (स्‍टे आर्डर) कम कर दिए जाएंगे, जल बिजली(विद्युत) कारखाना और अन्‍य बिजली-घर(पावर प्‍लान्‍ट्स/ऊर्जा संयंत्र) का विकास/निर्माण तेजी से होगा। इससे बिजली पैदावार/उत्‍पादन में सुधार होगा
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